ज़िंदगी का सफ़र
ज़िंदगी सिर्फ़ साँसों का नाम नहीं,
यह हयात है, एक एहसास भी।
कभी हस्ती बनकर सवाल करती है,
कभी ख़ामोशी में जवाब देती है।
यह जीवन-यात्रा है, कभी धूप-कभी छाँव,
कभी मंज़िल दूर, कभी पास गाँव।
कभी जीवन-संघर्ष, कभी मधुर गीत,
कभी हार के भीतर छुपी होती जीत।
यह जीवन-पथ है, काँटों से भरा,
फिर भी मनुष्य चलता रहे—यही है हौसला।
हर मोड़ सिखाता है कोई जीवन-सत्य,
हर अनुभव बन जाता है जीवन का तथ्य।
कभी राह-ए-हयात में अकेलापन मिलता है,
कभी कारवाँ-ए-ज़िंदगी में अपना कोई मिलता है।
कभी सवाल उठते हैं—“मैं कौन हूँ? मेरी हस्ती क्या है?”
यहीं से शुरू होता है फ़लसफ़ा-ए-हयात।
ज़िंदगी एक जीवन-प्रवाह है—बहती चली जाती है,
जो रुक गया, वह पीछे छूट जाता है।
इसलिए हर पल को प्रेम से जीना सीखो,
अपने अस्तित्व को पहचानना सीखो।
क्योंकि अंत में यही जीवन-दर्शन समझ आता है—
धन नहीं, पद नहीं, सब यहीं रह जाता है;
साथ जाते हैं केवल कर्म और अनुभव,
और इंसान के भीतर बची हुई उसकी हस्ती।
ज़िंदगी” के लिए कुछ काव्यात्मक शब्द
हयात — जीवन
हस्ती — अस्तित्व
आश्तियाँ — जीवन/दुनिया के संदर्भ में काव्यात्मक प्रयोग
दौर-ए-हयात — जीवन का काल
सफ़र-ए-ज़िंदगी — जीवन की यात्रा
कारवाँ-ए-ज़िंदगी — जीवन का कारवाँ
फ़लसफ़ा-ए-हयात — जीवन का दर्शन
राह-ए-हयात — जीवन का मार्ग