अपने बेटे को किसी का गुंडा मत बनाना
अपने बेटे को किसी का गुंडा मत बनाना,
नहीं तो उससे पाप की बू आएगी।
भले ही वह महंगे कपड़े पहने,
मजबूत शरीर बनाए,
लोग उससे डरें भी—
पर यदि मनुष्यता मर गई,
तो वह चलता-फिरता रोग होगा।
याद करो उस मासूम को,
जब वह पहली बार तुम्हारी गोद में आया था।
कितनी खुशियाँ मनाई थीं तुमने,
कितने सपने सजाए थे उसके लिए।
पर धीरे-धीरे संसार उसे निगल जाता है,
अहंकार, लालच और हिंसा उसे घेर लेते हैं।
और एक दिन,
मनुष्य का शरीर तो बचा रहता है,
पर भीतर का इंसान मर जाता है।
तब वह बेटा नहीं रहता,
सिर्फ एक पशु बन जाता है।
इसलिए उसे धन से पहले संस्कार देना,
ताकत से पहले करुणा देना,
और सफलता से पहले इंसानियत देना।
क्योंकि अंत में वही बेटा महान कहलाता है,
जिससे लोगों को भय नहीं,
विश्वास और प्रेम मिले।॥
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