जो अपमान न सह सका इस क्रूर दुनिया में,
वो क्या जिएगा इस बेरहम दुनिया में।
यहाँ हर सच को चुप रहना पड़ता है,
और हर आँसू को हँसी में छिपाना पड़ता है।
जो हर ठोकर से टूट गया राह में,
वो कैसे चलेगा जीवन की चाह में।
अपमान ही सिखाता है सहन की कला,
यही बनाता है इंसान को भीतर से भला।
जो झुककर भी खुद को खोने न दे,
वही सच में जीना यहाँ सीख ले।
क्रूर है दुनिया, पर यही सिखाती है—
अपमान सहकर भी गरिमा बचानी है।
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