जीवन एक राह है, जिस पर हमें आनंद से चलना है |जो निरंतर बदल रहा है क्या हम उसे देख पा रहे है
वो होश कहां है, वो शान्ति कहां है, वो सौन्दर्य कहां है जिसे हम खोज रहे है |भीतर की अकुशलता,भीतर का भय,भीतर की चिंता,भीतर का लालच हमारी बाहर की जिंदगी को प्रभावित करता है,अकुशलता बाहर नहीं भीतर होती है|भीतर की शांति हमे पारस पत्थर देती उसे हम जिसे भी छुआ दे वह सोना हो जाता है|-MANOJ PARMAR SIR
Tuesday, 30 December 2025
खामोशी से सहने वाला ही बनाता है अपना आसमान
अपमान ही जिनकी रोज़ी है, वही सबसे छोटे लोग हैं,
दूसरों को तोड़कर जो हँसें, उनके भीतर खोखले रोग हैं।
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