Tuesday, 30 December 2025

सब्र को जो सीने में रखे, वही लिखता है अपना नाम।

 

जो अपमान को पेशा बनाए, वो किरदार बौने होते हैं,

दूसरों की तौहीन में ही जिनके सपने सोने होते हैं।


तानों से चलती है जिनकी रोज़ी, ज़िल्लत उनका काम,

सब्र को जो सीने में रखे, वही लिखता है अपना नाम।

No comments:

Post a Comment