Monday, 26 October 2015

"कुछ लोग"

कुछ लोग कहते हैं मैं
छोटी छोटी कविताओ को
पड़कर शांत हो जाऊ
न अक्षर,न शब्द ,न रूप
मुझे शांत कर पाएंगे
भिखारी कहता है भीख
का इन्तजार ,तृप्त हो जाओगे
मेंढक कहता है ,पानी का इंतजार कर
तृष्णा समाप्त हो जाएगी
मक्खी कहती है किसी के
जूठन फेकने का इन्तेजार कर
भूख  मिट जाएगी
मेरी चाह तुम्हारी चाह में नहीं
मेरी भूख तुम्हारी जैसी नहीं
तृष्णा को न शांत करना
न तृप्त करना है
तृष्णा ही न रहे
ऐसा करना है|

"विरोध और समर्थन"


समर्थन और विरोध निजी होते है
यह व्यक्ति की समाझदरी और मूर्खता
पर  निर्भर करता है  

सुकरात दृढ़ थे 
की जो गलत है वो गलत है 
उसे सही क्यों मानो
और विष पि गए 

अरस्तु थोड़े लचीले हुए
अवसर के अनुसार चले 
 जीवन  को बचाते हुए चले 
उन्होंने मूर्खो को भी सही कहा
और समझदारो को भी सही कहा 

जो समझ गया वह समझदार 
नहीं तो …..😉

 

Sunday, 25 October 2015

"मत्स्यावतार"

कभी कभी एस धरा 
की गति में रूचि नहीं रह जाती है,
जो पीना था यहाँ
पी लिया,अब कुछ
बाकी न रहा,
समुंदर की मछली
तालाब में बैचैन हो जाती है
कीचड़ मैं श्वास लेना
मुश्किल हो जाता है,
न तो खाद्य पधार्थ भाते है
न ही किताबे
सार जो था पी लिया
अब कुछ और चाहिए
शायद यहाँ नहीं 
कही और मिलेगा
नया स्वाद नया रोमांच
नया अनुभव
कुछ ऐसा जो अभी भी
बुद्ध,महावीर के धयान
में झलकता है
शायद उनके आँख खोलने
की देर है
और मेरे बंद करने की |

"उधार"

कुछ समय उधार लिया था
अब जिंदगी से चुका रहा हूँ
अगर कुछ बाकी रह गया
तो फिर से जिंदगी लेनी होगी
समय का उधार तभी चुकेगा
जब ईश्वर मैं विलीन होने की
 योग्यता आ जाएगी|

"चोट "

चाहिये ऐसा जो लगातार 
हमारे अहंकार पर 
चोट लगाता  रहे 
अहंकार का पोषण मुझे भटकता रहा 
अहंकार के पोषित करने 
 वाले  लोग 
मुझे गुमराह  करते  रहे । 

अचानक जब किसी ने अहंकार 
पर  चोट की,तो मैं बोखला  गया 
हतप्रभ रह गया 
क्रोधी हो गया 
विध्वंसकारी हो गया 

भीतर बैठा परमात्मा मौन था 
शांत था ,ठंडी हवा की तरह 
मंद मंद मुस्कुरा रहा था 
मैं परमात्मा से अलग हो गया परन्तु
जब पुनः परमात्मा में 
विलीन हुआ तो सब भूल गया 
और  मौन हो गया ।



"प्रेम"

कुछ नकारत्मक  जब  जीवन मे 
बड़ जाता है ,
तब हमे किसी  से प्रेम हो जाता  है 
हम सदा विपरीत  ध्रुव 
तलशते हैं ।
मन को  गहन शांति
 विपरीत से प्रेम करने पर ही मिलती है ।
Photograph:Prabhu Parmar

"मित्र"

अपने कामकाज के कारण
मित्रो से मिलना ना हो सका
कुछ दुश्मनों ने दिल दुखाया तो 
मित्रो की याद आयी
धन्यवाद उन दुश्मनों का जो
मित्रो की याद दिलाते है
और उनसे गपशप
करने का मोका देते हैं|
Photograph:Prabhu Parmar