“किशोरावस्था से आज तक” "ये कविताएँ जीवन के उन पलों की अभिव्यक्ति हैं, जहाँ भावनाएँ शब्दों में ढलकर एक राह बनाती हैं — जीने की राह।" -MANOJ PARMAR SIR
दुनिया न्यायालय नहीं है। कई जगह शक्ति > सत्य होती है।
यह समझ लेना हार नहीं है, यह यथार्थ-बोध है।
जो व्यक्ति हर जगह न्याय ढूँढता है, वह निराश हो जाता है। जो व्यक्ति व्यवस्था को समझता है, वह रणनीति बनाता है।
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