जीवन एक राह है, जिस पर हमें आनंद से चलना है |जो निरंतर बदल रहा है क्या हम उसे देख पा रहे है
वो होश कहां है, वो शान्ति कहां है, वो सौन्दर्य कहां है जिसे हम खोज रहे है |भीतर की अकुशलता,भीतर का भय,भीतर की चिंता,भीतर का लालच हमारी बाहर की जिंदगी को प्रभावित करता है,अकुशलता बाहर नहीं भीतर होती है|भीतर की शांति हमे पारस पत्थर देती उसे हम जिसे भी छुआ दे वह सोना हो जाता है|-MANOJ PARMAR SIR
Monday, 16 February 2026
“हर जगह न्याय नहीं मिलेगा”
“हर जगह न्याय नहीं मिलेगा”
दुनिया न्यायालय नहीं है।
कई जगह शक्ति > सत्य होती है।
यह समझ लेना हार नहीं है,
यह यथार्थ-बोध है।
जो व्यक्ति हर जगह न्याय ढूँढता है,
वह निराश हो जाता है।
जो व्यक्ति व्यवस्था को समझता है,
वह रणनीति बनाता है।
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