इस दुनिया में इंसान जो बन जाए,
वो हर दर्द को अपने कंधों पर संभाल लेता है।
आँसुओं की बारिश में भी वह मुस्कुराता है,
और टूटे हुए सपनों को जोड़ना जान जाता है।
तानों और ठोकरों के बीच,
वो हार नहीं मानता, चलता जाता है।
हर चोट, हर अपमान उसे मजबूत बनाता है,
और उसका दिल और बड़ा, और उसकी रूह और गहरी हो जाती है।
इंसान वही है, जो दर्द को समझकर भी,
दूसरों के लिए सहारा बन जाए।
इस दुनिया में जो बन जाए इंसान,
वो हर आँधियों में भी दीप जलाए रखता है।
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