कविता: “रुका हुआ समय”
कभी-कभी समय रुक जाता है,
और उस ठहराव में जीवन झुक जाता है।
भागती साँसों के शोर के बीच,
कोई अपना चुपचाप मिल जाता है।
वो जो भीड़ में खो गया था कहीं,
रुके समय में सामने आ जाता है।
जो बरसों से इंतज़ार में खड़ा था,
वो एक पल में अपना बन जाता है।
समय जब चलता है, हम खो जाते हैं,
और जब थमता है, रिश्ते मिल जाते हैं।
कभी-कभी रुकना भी ज़रूरी होता है,
ताकि जो हमारा है… वो हमें मिल जाता है।
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